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अब कार्यवाही का जल्द ही होगा सीधा प्रसारण

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का जल्द ही सीधा प्रसारण किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस पर सहमति जताते हुए कहा कि कोर्ट रूम से भीड़ कम करने के लिए वह ‘ओपन कोर्ट’ की अवधारणा को लागू करना चाहता है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के सुझाव को मानते हुए मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया। पीठ ने कहा, ‘हमें सीधे प्रसारण में कोई कठिनाई नहीं दिखती। पहले हम इसे शुरू करेंगे और देखेंगे कि क्या होता है। यह पायलट प्रोजेक्ट है और समय के साथ इसमें सुधार करेंगे।’
 इससे पहले अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने सुझाव दिया था कि पायलट परियोजना के आधार पर अहम मुकदमों का सीधा प्रसारण किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘सीधे प्रसारण में 70 सेकेंड की देरी होनी चाहिए ताकि अगर कोई वकील दुर्व्यवहार करे या मामला व्यक्तिगत निजता या राष्ट्रीय सुरक्षा जैसा संवेदनशील हो तो जज साउंड बंद कर सकें। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कोर्ट नंबर 1 (सीजेआई कोर्ट) से सीधा प्रसारण शुरू किया जाए। इसकी सफलता पर निर्भर करेगा कि सुप्रीम कोर्ट की सभी और देशभर की अदालतों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाए या नहीं।’ साथ ही उन्होंने कोर्ट रूम से भीड़ कम करने के लिए कोर्ट परिसर में एक मीडिया रूम स्थापित करने का सुझाव दिया ताकि वादी, पत्रकार, वकील और आगंतुक कार्यवाही को देख सके।सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद एक वकील ने सीधे प्रसारण के सुझाव का विरोध करते हुए कहा कि इसका न्याय प्रशासन पर असर पड़ेगा। आधार और अयोध्या जैसे संवेदनशील मामलों में जजों के अवलोकन और वीडियो क्लिप का इस्तेमाल कर फर्जी खबरों को बढ़ावा मिलने का खतरा होगा। हालांकि कोर्ट ने उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया।

कानून की छात्रा स्वप्निल त्रिपाठी ने याचिका दाखिल कर अदालती कार्यवाही के सीधा प्रसारण कक्ष स्थापित करने और कानून के छात्रों को यहां तक पहुंचने की सुविधा देने का अनुरोध किया था। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने भी याचिका दायर कर अहम मुकदमों की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का अनुरोध किया था। इसके अलावा एक गैरसरकारी संगठन ने भी इस मामले में जनहित याचिका दायर की थी।

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