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चाइना से आगे निकला भारत, 20 वर्ष बाद होने जा रहा ये पहली बार

विदेशी निवेश के मामले में यह वर्ष चाइना की तुलना के हिंदुस्तान के लिए बेहतर साबित हो रहा है. दक्षिण एशियाई राष्ट्रों में चाइना के मुकाबले हिंदुस्तान में लगभग 20 वर्ष बाद अधिक निवेश होने जा रहा है. ग्लोबल फाइनेंशियल कंटेंट कंसल्टिंग कंपनी डियालॉजिक के आंकड़ों में यह तथ्य सामने आए हैं.

डियालॉजिक के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष अभी तक विदेश कंपनियों ने 38 अरब डॉलर यानी करीब 2700 अरब रुपये का निवेश हिंदुस्तान में करते हुए इंडियन कंपनियों में हिस्सेदारी ली है. वहीं इस दौरान चाइना की कंपनियों में विदेशी कंपनियों ने 32 अरब डॉलर यानी करीब 2300 अरब रुपये का ही निवेश किया है. हिंदुस्तान में यह निवेश उपभोक्ता रिटेल एरिया में अधिक हुआ है.

इस साल इंडियन कंपनियों में 38 जबकि चीनी कंपनियों में 32 अरब डॉलर का हुृआ निवेश

विदेशी निवेश के इन ताजा रुझानों को देखते हुए हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा खज़ाना (आईएमएफ) के अर्थशास्त्रियों ने उम्मीद जताई थी कि आने वाले सालों के दौरान जहां चाइना में विदेशी कंपनियों के निवेश में गिरावट देखने को मिलेगी वहीं हिंदुस्तान में 7 प्रतिशत की अधिक गति से निवेश को बढ़ता देखा जा सकेगा.

आईएमएफ ने दावा किया था कि वैश्विक निवेशकों के रुझान में यह परिवर्तन अमेरिका  चाइना के बीच जारी ट्रेड वॉर के चलते देखने को मिल रहा है. इससे विदेशी निवेशक अब चाइना की स्थान हिंदुस्तान पर दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं.

हाल में अमेरिका में आईटी एरिया की महान आईबीएम के प्रमुख 8 सॉफ्टवेयर के अधिग्रहण का ऐलान इंडियन आईटी महान एचसीएल ने किया है. यह सौदा 1.8 अरब डॉलर यानी करीब 1300 करोड़ रुपये में हो रहा है. वहीं भारत यूनीलीवर (एचयूएल) ने नेस्ले को पछाड़ते हुए इंग्लैंड की फार्मा महान कंपनी गैल्कसोस्मिथक्लाइ (जीएसके) कंज्यूमर के प्रमुख ब्रांड हॉर्लिक्स का अधिग्रहण किया था.

इस अधिग्रहण के लिए एचयूएल को करीब 32,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े. इससे पहले मई में राजस्व के आधार पर संसार की सबसे बड़ी कंपनी वॉलमार्ट ने इंडियन ई-रिटेल महान फ्लिपकार्ट को खरीद लिया था. इस सौदे को दोनों कंपनियों ने 16 अरब डॉलर यानी करीब एक लाख करोड़ पर किया. वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट की 77 प्रतिशत हिस्सेदारी ली है.

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