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महिला एवं बाल विकास मंत्री ने महिला आयोग को कार्रवाई का अधिकार देने की वकालत

महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने शुक्रवार को बोला कि राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) को सशक्त करके ही स्त्रियों के अधिकारों की रक्षा हो सकती है. यदि आयोग को स्त्रियों की शिकायत पर कार्रवाई का अधिकार मिल जाए तो कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामले रोकने में बहुत ज्यादा मदद मिलेगी.

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर अक्तूबर में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में मंत्री समूह (जीओएम) बना था. 10 दिसंबर को इसकी पहली मीटिंग होगी.मीटिंग में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एनसीडब्ल्यू को एससी/एसटी जैसे अन्य आयोगों की तरह सशक्त बनाने की मांग करेगा.

इसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण  मेनका गांधी शामिल होंगी. मेनका गांधी ने बोला राष्ट्रीय महिला आयोग को बिलकुल सिविल न्यायालय जैसे अधिकार मिलने चाहिए. इन अधिकारों में जुर्माना, जांच के दौरान दस्तावेज को सील करने के अधिकार शामिल हैं.

बता दें कि अक्तूबर में मीटू अभियान के मद्देनजर मंत्री समूह का गठन किया गया था. इसका कार्य कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निषेध अधिनियम 2013 में परिवर्तन का खाका तैयार करना है. मंत्री समूह को अधिनियम के मौजूदा ढांचे  कानूनों को प्रभावी बनाकर तीन महीने में बदलावों की सिफारिश करना था.

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