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एच-1बी वीजा पर कार्य करने वाले ये इंडियन भविष्य को लेकर आशंकाओं में

एच-1बी वीजा पर अमेरिका के नए नियम इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग के लिए संकट खड़ा कर सकते हैं. इस वीजा पर अमेरिका ने इस वर्ष न सिर्फ संख्या में कटौती की है, बल्कि नियमों को भी कड़ा कर दिया है. आव्रजन नीति में परिवर्तन के कारण अमेरिका में एच-1बी वीजा पर कार्य करने वाले पांच लाख इंडियन अपने भविष्य को लेकर आशंकाओं में घिर गए हैं.

राष्ट्र के आईटी एरिया के संगठन नैस्कॉम के मुताबिक नए वीजा नियमों से सिर्फ इंडियन हुनरमंदों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि अमेरिकी आईटी कंपनियां भी प्रभावित होंगी.इंडियन कंपनियों में डेढ़ लाख लोग फिल्हाल राष्ट्र से बाहर जॉब कर रहे हैं  वीजा की संख्या घटने से इन कंपनियों को खासी कठिनाई झेलनी पड़ सकती है.
घटेगी संख्या, महंगा होगा वीजा

नैस्कॉम ने कंपनियों के अच्छे कर्मचारियों को वीजा देने की राय जाहिर करते हुए बोला है कि फिल्हाल वह वीजा नियमों पर अध्ययन कर रहा है. अध्ययन के बाद वह इस मामले में अपना स्पष्ट पक्ष रखेगा. अमेरिका के एच1बी वीजा पर नए नियमों के चलते अगले वर्ष से सिर्फ 65 हजार वीजा ही मिलेंगे, जिनकी संख्या पहले 85 हजार हुआ करती थी. ऐसे में आईटी पेशेवरों के लिए वीजा लेने में कंपनियों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना होगा. इसके साथ ही वीजा लेना महंगा भी होगा. उल्लेखनीय है कि नए नियमों में अमेरिका के डिग्री धारकों को प्राथमिकता देना तय किया गया है.

किस्मत से मिलेगा वीजा

नए वीजा नियमों के तहत अप्रैल, 2019 से एच1बी वीजा मुहैया कराने की प्रक्रिया लॉटरी के जरिए होगी. ऐसे में इंडियन पेशेवरों के लिए वीजा मिलना भाग्य का भी खेल होगा. एच1बी वीजा अस्वीकार करने की दर मौजूदा समय 65 प्रतिशत तक बढ़ी है, जिसमें नए नियमों के बाद  बढ़ोतरी होगी.

बताते चलें कि ट्रंप गवर्नमेंट ने शुक्रवार को एच-1बी वीजा आवेदन प्रक्रिया में बड़ा परिवर्तन करने का प्रस्ताव दिया था. इसके तहत एच-1बी वीचा चाहने वाली कंपनियों को पहले से अपनी अर्जी इलेक्ट्रॉनिक रूप में पंजीकृत करने की आवश्यकता होगी. हालांकि इसका मकसद यह बताया जा रहा है कि गवर्नमेंट चाहती है कि यह लोकप्रिय वीजा सिर्फ अत्यधिक कुशल  ऊंची पगार वाले विदेशी श्रमिकों को ही मिले.

अमेरिका की शीर्ष कंपनियों ने हालांकि ट्रंप गवर्नमेंट को चेताया है कि एच-1बी वीजा के नए नियमों से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा. कई कंपनियों के सीईओ ने ट्रंप गवर्नमेंट को लेटर भेजा है. इस लेटर में एपल के सीईओ टिम कुक, जेपीमोर्गन के सीईओ जेमी डिमॉन, कोका कोला के जेम्स क्वीनी  आईबीएम के गिनी रोमेटी समेत 59 शीर्ष कंपनियों के सीईओ ने हस्ताक्षर किए हैं.

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