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शेयर मार्केट में निवेश करने वाले निवेशकों को सेबी से मिली ये राहत

शेयर मार्केट में निवेश करने वाले राष्ट्र भर के वैसे लाखों निवेशकों को सेबी से राहत मिली है, जिनके पास भी अभी फिजिकल फार्म में ही कंपनियों के शेयर हैं. दरअसल शेयर मार्केटनियामक इंडियन प्रतिभूति विनिमय बोर्ड -सेबी- ने फिजिकल फार्म में पड़े शेयरों को डीमैट करवाने की जो अंतिम तिथि पांच दिसंबर 2018 तय की थी, उसे बढ़ा कर 31 मार्च 2019 कर दिया है. इस समय राष्ट्र में करीब 5.30 लाख करोड़ रुपये के शेयर फिजिकल फार्म में पड़े हैं जो कि लाखों निवेशकों में बंटे हैं. इनमें से अधिकांश को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि सेबी ने ऐसी अधिसूचना जारी कर दी है. इसलिए इस एरिया में कार्य करने वाले पेशेवरों ने सेबी से इस तिथि में विस्तार की गुहार लगाई थी.
शेयरों  प्रतिभूतियों में निवेश  फंसे निवेश को निकलनवाने के एरिया में सलाह देने वाले फर्म शेयर निवारण के सह संस्थापक विकास जैन का कहना है कि अभी भी राष्ट्र भर में करीब 5.30 लाख करोड़ रुपये के शेयर अभी भी फिजिकल फार्म में पड़े हैं. पुराने जमाने में जोऱ् निवेशक शेयर मार्केट में निवेश करते थे, उनमें से बहुत ज्यादा निवेशकों ने अभी तक डीमैट अकाउंट नहीं खुलवाया है. इनमें से ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक हैं. कुछ निवेशक तो ऐसे हैं, जो अपने कामकाज के दिनों में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों में रहते थे  कुछ कंपनियों में निवेश कर दिया. अब रिटायर्ड ज़िंदगी गांव मरें या दूर-दराज के इलाकों में गुजार रहे हैं. हाल ही में उनसे ऐसे ही एक निवेशक ने संपर्क किया था. जब उन्हें बताया गया कि पांच दिसंबर तक ही फिजिकल शेयर को डीमैट करवाने का समय है, तो वे घबरा गए. इसलिए, सेबी को अंतिम तिथि बढाने के बारे में ढेरों रिप्रजेंटेशन मिला था. इसके बाद सेबी ने इसे बढ़ा कर 31 मार्च 2019 कर दिया है.
सेबी ने आठ जून 2018 को ही एक अधिसूचना निकाल कर फिजिकल शेयर को डीमैट फार्म में बदलवाने की अंतिम तिथि पांच दिसंबर 2018 तय कर दिया था. इसके बाद फिजिकल फार्म में रखे शेयर सर्टिफिकेट का कोई मूल्य नहीं रह जाएगा. हालांकि निवेशकों  पेशेवरों से रिप्रजेंटेशन मिलने के बाद छह नवंबर 2018 को सेबी ने एक सरकुलर निकाल कर वैसे निवेशकों को राहत दी, जिनके पुराने शेयर सर्टिफिकेट  पैन कार्ड में नाम या हस्ताक्षर में अंतर था या पैन कार्ड नहीं था.
हाल ही में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल पहली अक्टूबर को बांबे शेयर मार्केट -बीएसई- के संवंदी सूचकांक -सेंसेक्स- में शामिल 30 कंपनियों के शेयरों में से ही करीब चार प्रतिशत शेयर फजिकल फार्म में थे. यह तो सिर्फ एक नमूना भर है क्योंकि राष्ट्र के सभी शेयर बाजारों में 5000 से भी ज्यादा कंपनियां सूचीबद्घ हैं. जैन का कहना है कि इन कंपनियों के करोड़ों-करोड़ रुपये के शेयर अभी भी फिजिकल फार्म में हैं.
पहले जब कोई आदमी किसी कंपनी का शेयर खरीदता था, उन्हें कंपनी की तरफ से छपा हुआ एक शेयर प्रमाण लेटर जारी किया जाता था. यही प्रमाणपत्र फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट है. इसे जब किसी डीमैट सेवा देने वाली कंपनी के पास जमा करा दिया जाता है  उसे इलेक्ट्रोनिक फार्म में बदल दिया जाता है तो वह डीमैट शेयर कहलाता है.

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