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गवर्नमेंट ने स्टडी इन इंडिया को दिया बढ़ावा, हिंदुस्तान आकर पढ़ सकेंगे विदेशी विद्यार्थी

हर वर्ष करीब तीन लाख विद्यार्थी पढ़ने के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन यहां आकर पढ़ने वाले विदेशी विद्यार्थियों की संख्या सालाना महज 50,000 ही पहुंच पाती है.
राष्ट्र के विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों में यह संख्या बढ़ाने  विदेशी विद्यार्थियों के लिए यहां आकर पढ़ने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए गवर्नमेंट ने इसी वर्ष स्टडी इन इंडिया अभियान की आरंभ की है.इसकी जिम्मेदारी मिनी रत्न कंपनी एडसिल इंडिया लिमिटेड को सौंपी गई है. इस दिशा में आगे के कार्यों पर शिशिर चौरसिया ने एडसिल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष  एमडी दीप्तिमान दास से खास वार्ता की. पेश हैं अंश :

प्रश्न- केंद्र ने स्टडी इन इंडिया अभियान की जिम्मेदारी एडसिल इंडिया लिमिटेड को सौंपी है. विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित करने की दिशा में क्या हो रहा है? 

उत्तर– सभी हिंदुस्तानियों को इस बात की जानकारी है कि राष्ट्र में आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, आईआईआईटी, वीआईटी, एसआरएस  जेएनयू जैसे विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान हैं. लेकिन विदेशी विद्यार्थियों  उनके अभिभावकों को इस विषय में कम जानकारी है. उन सभी तक इन संस्थानों  उनके शैक्षणिक कैलेंडर की जानकारी समय पर पहुंचाने के लिए गवर्नमेंट ने स्टडी इन इंडिया अभियान की आरंभ की है.

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि राष्ट्र से हर वर्ष करीब तीन लाख विद्यार्थी अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया  अन्य राष्ट्रों में पढ़ने जाते हैं. इसके उलट हमारे यहां सालाना करीब 50,000 विद्यार्थी ही पढ़ने आते हैं. इस अभियान के जरिए गवर्नमेंट की प्रयास इस संख्या को अगले पांच वर्ष में यानी 2023 तक चार गुना यानी दो लाख तक पहुंचाने की है. इस दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है.

प्रश्न- एडसिल इंडिया लिमिटेड ने मॉरीशस गवर्नमेंट संग मिलकर अर्ली डिजिटल लर्निंग परियोजना प्रारम्भ की है. इसके बारे में कुछ बताएं?  

उत्तर – अर्ली डिजिटल लर्निंग परियोजना (ईडीएलपी) के पहले चरण के तहत मॉरीशस में कक्षा एक  दो के बच्चों को तकनीक के जरिए एजुकेशन देने की कवायद चल रही है. इसके तहत वहां 27,000 स्मार्ट ई-टेबलेट की आपूर्ति प्रारम्भ की गई है.

टेबलेट की मदद से वहां के बच्चों को कहीं भी  कभी भी (एनी टाइम एनी व्हेयर) पढ़ने में सक्षम  बनाया जा रहा है. इस परियोजना के बेहतर परिणाम को देखते हुए मॉरीशस गवर्नमेंट ने इसके दूसरे चरण पर कार्य प्रारम्भ करने का अनुरोध किया है. दूसरे चरण में कक्षा तीन के बच्चों को शामिल किया जाएगा.

प्रश्न- एडसिल इंडिया लिमिटेड ने एक औनलाइन टेस्टिंग एंड असेसमेंट सर्विसेज (ओटीएएस) वर्टिकल प्रारम्भ किया है. इस एरिया में कैसी प्रगति है?

उत्तर– मुझे लगता है कि भविष्य में औनलाइन टेस्टिंग  असेसमेंट का उपाय ही सर्व स्वीकार्य होगा क्योंकि इसमें पारदर्शिता है. इसके तहत केंद्र गवर्नमेंट की कंपनियों, स्वायत्त संस्थाओं  सरकारी विभागों में औनलाइन टेस्टिंग  असेसमेंट की जाती है. हाल ही में कई राज्यों में भी इसे प्रारम्भ किया गया है. वर्तमान में इम्तिहान लेने  इसके परिणाम जारी करने में जिस प्रकार से पक्षपात  भेदभाव की खबरें सामने आती हैं, ऐसी स्थिति में यह ओटीएएस बिल्कुल अलग है.

इसे 2015 से प्रारम्भ किया गया है. उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि किसी पीएसयू में कुछ पदों पर भर्ती निकलती है, जिस पर अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को एक लिंक मुहैया कराई जाती है. उन्हें औनलाइन तरीके से ही कॉल पत्र भेजा जाता है. फिर औनलाइन टेस्ट के बाद परिणाम भी औनलाइन तरीके से जारी किया जाता है. परिणाम जारी करने से पहले प्रश्नों का उत्तर औनलाइन जारी कर दिया जाता है ताकि कोई गलती होने पर उम्मीदवार अपनी असहमति जाहीर कर सकें. कुछ सालों में इस वर्टिकल की प्रशंसा हुई है. ओटीएएस के जरिए तीन वर्ष में 45 लाख उम्मीदवारों का परीक्षण किया गया है.

प्रश्न- एडसिल इंडिया लिमिटेड सलाहकार सेवाएं भी दे रही है?

उत्तर- जी हां, सही बोला आपने. एडसिल इंडिया लिमिटेड शैक्षिक एरिया में सलाहकार सेवाएं भी दे रही है. राष्ट्रीय महत्व के किसी भी सरकारी संस्थान को देख लें, उसका ब्लू प्रिंट या डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) एडिसल इंडिया लिमिटेड ही बनाती है. इसके अतिरिक्त हम गवर्नमेंट या सरकारी संगठनों के लिए भी कई कार्य करते हैं. हमारा एक इंफ्रास्ट्रक्चर विंग भी है, जो किसी परियोजना को धरातल पर उतारने में मदद करता है.

प्रश्न- समय कम है  कार्य बहुत अधिक. इतनी कम अवधि में कैसे लक्ष्य पूरा होगा?  

उत्तर- इस अभियान के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी  अफ्रीकी राष्ट्रों सहित करीब 30 राष्ट्रों को लक्ष्य किया गया है, जहां के विद्यार्थी यहां पढ़ने आते हैं. कम समय में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन 160 विश्वविद्यालयों  अन्य शिक्षण संस्थानों से गठबंधन की गई है, जिन्हें नेशनल इंस्टीट्यूशन रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) से उच्च रैंकिंग मिली है.

साथ ही ये नेशनल एक्रिडेशन एंड असेसमेंट काउंसिल (एनएएसी) से मान्यता प्राप्त हों. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ‘स्टडीइनइंडिया डॉट जीओवी डॉट इन’ नामक वेब पोर्टल विकसित किया गया है. इसके जरिए विदेशी विद्यार्थी घर बैठे आवेदन कर सकते हैं.

लक्षित राष्ट्रों में रोड शो करने के साथ सोशल मीडिया के जरिए एडवरटाईजमेंट अभियान भी चलाया जाएगा. इसके अतिरिक्त केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी), विदेश मंत्रालय  गृह मंत्रालय मिलकर ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं, जिससे विदेशी विद्यार्थियों को यहां आने के लिए सरलता से वीजा मिल सके. साथ ही कुछ विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में फी-वेवर देने का भी खाका खींचा गया है. इसके लिए गवर्नमेंट दो वर्ष तक के लिए फंड भी मुहैया करा रही है.

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