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हवाई कंपनियों को हो रहे लगातार घाटे पर विमानन मंत्रालय ने जताई चिंता

यात्रियों की संख्या बढ़ने के बावजूद हवाई कंपनियों को लगातार हो रहे घाटे से बचाने के लिए नागर विमानन मंत्रालय ने चिंता जताई है. मंत्रालय का कहना है कि हवाई ईंधन (एटीएफ) को जल्द से जल्द GST के दायरे में लाया जाए.

काउंसिल को लिखा पत्र

मंत्रालय ने GST काउंसिल  राज्य सरकारों को लेटर लिखकर बोला है कि वो एटीएफ को GST में लाने के लिए विचार करने को बोला है. मंत्रालय ने लेटर में लिखा है कि बड़ी हवाई कंपनियों के लिए GST दर 18 प्रतिशत  छोटे विमानों के लिए एटीएफ पर GST 5 प्रतिशत रखने की मांग की है. छोटे विमानों का उड़ान योजना में इस्तेमाल हो रहा है. इन विमानों में अधिकतम 40 यात्री सफर कर सकते हैं.

अभी राज्यों में है अलग शुल्क

राष्ट्र के सभी राज्यों में एटीएफ पर अलग-अलग कर वसूला जाता है. महाराष्ट्र  दिल्ली में एटीएफ पर 25 प्रतिशत कर लगता है. हालांकि यह सभी विमानों पर एक समान लगता है.नागर विमानन सचिव आर एन चौबे ने बोला कि इस मुद्दे को GST काउंसिल की अगली मीटिंग में लिया जाएगा. अगर एटीएफ को GST के दायरे मे लाया जाता है तो फिर इससे ईंधन के दाम कुछ हद तक सीमित हो जाएंगे. हालांकि अभी तक सभी राज्य सरकारों ने ऑयल के दाम को GST में लाने का विरोध किया है.

पिछले एक वर्ष में हवाई ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में 40 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हो चुकी है, जिसके कारण कंपनियां ऐसा कदम उठाने को मजबूर हो रही है. बताते चलें कि हवाई परिचालन में ईंधन पर कंपनियों का सबसे ज्यादा पैसा खर्च होता है.

इतना आया कंपनियों का खर्चा 

हवाई ईंधन पर राष्ट्र की तमाम हवाई कंपनियों का बहुत ज्यादा पैसा पिछले एक वर्ष में खर्च हुआ है. स्पाइसजेट का खर्चा 52 प्रतिशत बढ़कर 812 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इंडिगो का ईंधन खर्च 54 प्रतिशत बढ़कर 2,715 करोड़ रहा. जेट एयरवेज का ईंधन खर्च 53 प्रतिशत बढ़ गया है. इससे कंपनियों के शुद्ध मुनाफे में भी कमी आई है.

सभी कंपनियों की हालत खस्ता

इस वजह से सभी कंपनियों की हालत बहुत ज्यादा खस्ता हो चुकी है. खर्च बढ़ने के कारण स्पाइसजेट को 14 तिमाहियों में पहली बार नुकसान हुआ है.

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