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पाकिस्तान ने आज पूरी संसार को ये संदेश देने का किया प्रयास 

आज सबसे पहले हम संसार की सबसे बड़ी ख़बर का विश्लेषण करेंगे ये ख़बर पूरी संसार में मौजूद सिख समुदाय के करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ी हुई है   आज पाक में करतारपुर साहिब के Corridor की नींव रखी गई है

इस रास्ते के ज़रिए हिंदुस्तान के श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के सीधे करतारपुर साहिब के दर्शन कर पाएंगे   आज बहुत से लोगों को ये लग रहा होगा कि अब पाक सुधर गया है  उसका हृदय-परिवर्तन हो गया है 

पाकिस्तान ने आज पूरी संसार को ये संदेश देने की प्रयास की है कि वो एक बहुत शांतिप्रिय  उदार राष्ट्र है  लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकार ये बात बहुत अच्छी तरह समझते हैं कि दो राष्ट्रों के बीच रिश्तों में उदारता जैसी कोई चीज़ नहीं होती हर कदम के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है  पाक की इस Corridor वाली कूटनीति के पीछे भी उसका स्वार्थ है, जिसका आज हम DNA टेस्ट करेंगे   लेकिन सबसे पहले ये जान लेते हैं कि करतारपुर साहिब Corridor क्या है ?

करतारपुर साहिब सिखों के लिए एक बहुत पूजनीय स्थल है क्योंकि ये सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव जी का घर था  गुरु नानक जी ने करतारपुर में ही अपने ज़िंदगी के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे  साल 1947 से पहले जब बंटवारा नहीं हुआ था तब श्रद्धालु बिना किसी रोक टोक के करतारपुर साहिब के दर्शन कर सकते थे  लेकिन बंटवारे के बाद करतारपुर साहिब का गुरुद्वारा पाक के हिस्से में चला गया  सिखों के लिए करतारपुर साहिब के दर्शन बहुत दुर्लभ हो गए  अभी  श्रद्धालुओं को 3 से 4 किलोमीटर दूर से  दूरबीन के ज़रिए करतारपुर साहिब की सिर्फ एक झलक देखकर ही संतुष्ट होना पड़ता है

करतारपुर साहिब के दर्शन करने के लिए सिख श्रद्धालुओं को पहले लाहौर जाना पड़ता है  इसके बाद 130 किलोमीटर का सफर तय करके पाक के Narowal ज़िले में पहुंचना होता है जहां करतारपुर साहिब गुरुद्वारा है  हिंदुस्तान में मौजूद डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के बीच की दूरी सिर्फ 3 या 4 किलोमीटर है लेकिन हिंदुस्तान  पाक के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा की वजह से श्रद्धालुओं को सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है 

भारत  पाक के बीच करतारपुर साहिब Corridor खुल जाने के बाद, हिंदुस्तान के श्रद्धालु बिना किसी औपचारिक रुकावट के बहुत सरलता से पाक की सीमा में जाएंगे  करतारपुर साहिब के दर्शन कर पाएंगे दोनों ही राष्ट्रों ने इस Corridor पर कार्य प्रारम्भ कर दिया है 

आज पाक में इसके लिए एक बड़ा आयोजन किया गया था  जिसमें हिंदुस्तान के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया  इस प्रोग्राम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे  पाक के पीएम इमरान खान, पाक के कई वरिष्ठ मंत्री  पाक के आर्मी चीफ़ जनरल क़मर जावेद बाजवा भी इस मौके पर मौजूद थे यहां मन में ये बात भी आती है कि ऐसे मौके पर आर्मी चीफ का क्या कार्य है पाक ने अपने सेना प्रमुख को बुलाकर एक तरह से खुद को ही Expose कर लिया है अब पूरी संसार को पता चल गया है कि पाक में सत्ता की चाबियां सेना के हाथ में हैं

पाकिस्तान ने इस पूरे आयोजन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने के मौके की तरह प्रयोग किया  पाक के पीएम इमरान खान, पाक के तेज़ गेंदबाज़ रह चुके हैं लेकिन आज उन्होंने इस मंच से हिंदुस्तान के विरूद्ध कूटनीति की Googly का प्रयोग किया है

हमने इमरान खान के पूरे सम्बोधन का विश्लेषण किया है जिससे पता चलता है कि उन्होंने पाक को एक उदार राष्ट्र के रूप में दिखाने की पूरी प्रयास की है   इसमें उनकी मदद की है कांग्रेस पार्टी के नेता  पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने

इमरान ख़ान ने आज धार्मिक सद्भाव वाली मीठी-मीठी बातें की  इसके बाद बोला कि हिंदुस्तान  पाक को फ्रांस  जर्मनी की तरह अपनी सारी दुश्मनी को भुलाकर एक हो जाना चाहिए  लेकिन इसके तुरंत बाद वो कश्मीर के मुद्दे पर आ गए कश्मीर ही पाक का वास्तविक Agenda था जिसे इमरान खान ने बहुत चालाकी से संसार के सामने रखा

पाकिस्तान एक ऐसा राष्ट्र है, जो अपने फायदे के लिए कभी इंसानों का प्रयोग करता है तो कभी धर्म के नाम पर अपना एजेंडा चलाता है इमरान खान ने करतापुर साहिब कॉरिडोर के शिलान्यास के मौके पर कश्मीर के मुद्दे को ज़बरदस्ती बीच में घुसाकर बिल्कुल ऐसा ही किया जिस वक्त इमरान खान, कश्मीर का मुद्दा उठा रहे थे उस वक्त नवजोत सिंह सिद्धू सामने बैठकर मुस्कुरा रहे थे विडंबना ये है कि उन्हें ये समझ में नहीं आया कि वो हिंदुस्तान के करोड़ों लोगों के जज़्बात को चोट पहुंचा रहे हैं,  पाक उन्हें कितनी सरलता से, अपने एजेंडे के तहत हाईजैक कर रहा है

इमरान खान  करतारपुर साहिब कॉरिडोर से कूटनीतिक मुनाफ़ा कमाने की प्रयास कर रहे थेउन्होंने कांग्रेस पार्टी के नवजोत सिद्धू के साथ सरहद पार वाला महागठबंधन भी कर लिया था लेकिन हिंदुस्तान की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पहले ही ये स्पष्ट कर दियाकि करतारपुर साहिब कॉरिडोर बनाने का मतलब ये नहीं है कि पाक को आतंकवाद के मुद्दे पर कोई डिस्काउंट मिल जाएगा जब तक पाक आतंकवाद का Export बंद नहीं करता तब तक ना तो मुलाकात होगी  ना ही कोई बात होगी 

अब आप पाक के सूचना  प्रसारण मंत्री फवाद हुसैन का ये Tweet देखिए

पाकिस्तान में करतापुर साहिब कॉरिडोर की नींव रखने के बाद उन्होंने Tweet किया

अगर आप इस Tweet में प्रयोग किए गए शब्दों को ध्यान से पढ़ेंगे, तो समझ जाएंगे, कि पाक को करतारपुर साहिब कॉरिडोर से कोई लेना देना नहीं है बल्कि वो तो सीधे-सीधे हिंदुस्तान के लोगों को सोची समझी रणनीति के तहत भड़काने का कार्य कर रहा है उदाहरण के तौर पर फवाद हुसैन ने अपने Tweet के आखिरी हिस्से में लिखा है, कि वो हिंदुस्तान में शांति की बात करने वाले लोगों से अपील करना चाहते हैं, कि नफरत फैलाने वालों के विरूद्ध खड़े हों  उन्हें Reject करें लेकिन, आज पाक से ये सवाल पूछा जाना चाहिए, कि दोनों राष्ट्रों के बीच में अशांति किसकी वजह से है ? कश्मीर में नफरत  खून खराबे का एजेंडा कौन चला रहा है ?

लेकिन पाक से ये सवाल पूछने की हिम्मत डिज़ाइनर पत्रकारों, नेताओं  बुद्धिजीवियों में नहीं है करतारपुर साहिब कॉरिडोर के शिलान्यास के इवेंट को Cover करने के लिए हिंदुस्तानके कई बुद्धिजीवी पत्रकार भी आज पाक में उपस्थित थे  लेकिन किसी ने कश्मीर के मुद्दे पर सवाल नहीं पूछा सब अपनी पाक यात्रा को लेकर उत्साहित थे  अपने डिज़ाइनर वीडियो Record करके, सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे हकीकत ये है कि पाक ने ख़ासतौर पर हिंदुस्तान के उन पत्रकारों को चुना था जो अपनी कवरेज में पाक के प्रति Soft रहते हैं

आपको याद होगा, कुछ दिन पहले CNN के एक पत्रकार ने एक Press Conference के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump से बहस की थी उस वक्त हमारे ही राष्ट्र के बुद्धिजीवी पत्रकारों ने पत्रकारिता की बड़ी बड़ी मिसालें दी थीं  Social Media पर लिखना शुरु कर दिया था, कि संसार के सबसे शक्तिशाली आदमी से किस तरह के सवाल पूछे जाने चाहिएं लेकिन, जब यही पत्रकार पाक पहुंचे, तो आज किसी ने इमरान ख़ान से ये नहीं पूछा, कि एक धार्मिक आयोजन के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाने की ज़रुरत क्या थी ?
शायद नवजोत सिंह सिद्धू ने भी आज अपने परम मित्र इमरान ख़ान से ये सवाल नहीं पूछा होगा

सवाल ये है कि ये सारे लोग कब तक हिंदुस्तान पर होने वाले हमलों को नज़रअंदाज़ करते रहेंगे क्या आतंकी हमलों  षडयंत्रों के बीच पाक के पीएम के साथ दोस्ती निभाना जायज़ हैक्या क्रिकेट वाली दोस्ती के लिए राष्ट्र के हितों को दांव पर लगाया जा सकता है?

खुशी के मारे कोई कह रहा था, Lahore Here We Come! किसी ने लिखा, कई वर्षों के बाद पाक आया हूं इसी बहाने कुछ पुराने दोस्तों से मुलाकात हो जाएगी  पाक को समझने का मौका भी मिलेगा

आज इमरान ख़ान की बातें सुनकर ऐसा लग रहा था, जैसे वो पाक में किसी चुनावी रैली को संबोधित कर रहे हों  नवजोत सिंह सिद्धू, हिंदुस्तान के किसी राज्य के मंत्री नहीं  बल्कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार हों इमरान ख़ान ने सिद्धू को पाक से चुनाव लड़वाने की बात कही  इशारों इशारों में नवजोत सिंह सिद्धू को भविष्य में हिंदुस्तान के पीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया हालांकि, सिद्धू को ये बात याद रखनी चाहिए, कि पाक  इमरान ख़ान कल भी उनका प्रयोग कर रहे थे  आज भी उनका प्रयोग ही कर रहे हैं  इस खेल में गंभीर एक्सीडेंट होने का ख़तरा है

वैसे एक्सीडेंट से याद आया कि कल ही पाक के कराची में एक Defence Exhibition प्रारम्भ हुई है  इस Exibition की आरंभ में ही पाक के सैनिकों ने अपनी बेइज़्ज़ती करवा ली

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