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उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारे में सुनाई देने लगी ये नयी दस्‍तक

पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनावों के बीच उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारे में नयी दस्‍तक सुनाई देने लगी है आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर सपा  बीएसपी के संभावित साझेदारी के मद्देनजर उनकी काट को खोजने के लिए योगी आदित्‍यनाथ गवर्नमेंट नया जातीय समीकरण तैयार कर रही है

ये इसलिए भी अहम है क्‍योंकि 11 दिसंबर को इन चुनावी राज्‍यों के नतीजे सामने आने के बाद अगर मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, राजस्‍थान में भाजपा को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले तो आगामीके मद्देनजर पूरा फोकस उत्तर प्रदेश की तरफ शिफ्ट हो जाएगा दरअसल भाजपा के नेतृत्‍व में 2014 केमें राज्‍य की 80 में से 73 सीटें एनडीए को मिली थीं इसलिए विपक्ष भाजपा को नुकसान पहुंचाने के लिए उसको उत्तर प्रदेश में घेरने की ही सबसे ज्‍यादा प्रयास करेगा

यूपी में विपक्ष की जातिगत गोलबंदी की योजना को देखते हुए सियासी जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट प्रदेश में आरक्षण व्‍यवस्‍था में बंटवारे के बारे में सोच रही है इस कड़ी में आरक्षण बंटवारे को लेकर गठित की गई सामाजिक न्याय समिति ने अपनी रिपोर्ट पिछले दिनों उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट को सौंप दी है सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आरक्षण कोटे को जाति के आधार पर सब-कैटेगरी में बांटा जाए

यूपी में विपक्ष की जातिगत गोलबंदी की योजना को देखते हुए सियासी जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट प्रदेश में आरक्षण व्‍यवस्‍था में बंटवारे के बारे में सोच रही है 

7-11-9 का फॉर्मूला
उत्तर-प्रदेश पिछड़ा समाजिक न्याय समिति ने अपनी रिपोर्ट में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को 7-11-9 के फॉर्मूले पर बांटने की सिफारिश की है समिति ने इसके लिए तीन वर्ग- पिछड़ा, अति पिछड़ा  सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग बनाने का प्रस्ताव दिया है मतलब, पिछड़ा वर्ग के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण, अति पिछड़ा के लिए 11 प्रतिशत  सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग को 9 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की गई है इस रिपोर्ट में पिछड़ा वर्ग में 12 जातियां, 59 जातियों को अति पिछड़ा  79 जातियों को सर्वाधिक पिछड़ों की श्रेणी में रखा गया हैं

उत्तर-प्रदेश पिछड़ा सामाजिक न्याय समिति का गठन 10 जून 2018 को योगी गवर्नमेंट ने किया था रिटायर्ड जस्टिस राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था कुछ दिन पहले ही इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट CM योगी आदित्यनाथ को सौंपी है  इस रिपोर्ट को परीक्षण के लिए समाज कल्‍याण विभाग को भेज दिया गया है

राजनीतिक विश्‍लेषकों के मुताबिक यदि उत्तर प्रदेश में सपा  बीएसपी के बीच साझेदारी होता है तोमें भाजपा को तगड़ी चुनौती मिल सकती है

7-7-8 का फॉर्मूला
समिति की रिपोर्ट में बोला गया है कि एससी  एसटी आरक्षण (कुल 22 फीसदी) को मिलाकर तीन सब कैटेगरी में बांट दिया जाए दलित को 7 फीसदी, अति दलित को 7 प्रतिशत महादलित को 8 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई है दलित वर्ग में 4, अति दलित वर्ग में 32  महादलित वर्ग में 46 जातियों को रखने की सिफारिश की गई है

सिर्फ इतना ही नहीं योगी गवर्नमेंट लंबे समय से 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की कैटेगरी में डालने के बारे में सोच रही थी प्रदेश में जिन 17 जातियों को अनुसूचित जातियों के दायरे में लाने की बात की जा रही थी उनकी आबादी करीब 13.63 प्रतिशत है

दरअसल, सपा  बीएसपी संभावित साझेदारी को देखते हुए भाजपा को पता है कि उसके ओबीसी  दलित वोटबैंक में सेंध लगना तय है इसलिए आरक्षण के जरिए नयी बिसात बिछाई जा रही है

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