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हवन करते समय स्वाहा बोलने के पीछे का असली मकसद नहीं जानते होंगे आप…

तमाम शुभ मौकों पर अक्सर घर में हवन का आयोजन किया जाता है. अगर आपने कभी ध्यान दिया हो तो देखा होगा कि मंत्र के बाद स्वाहा शब्द जरूर बोला जाता है, इसके बाद ही आहुति दी जाती है. ऐसा क्यों होता है, क्या इसके बारे में आपने कभी सोचा है? आइए हम आपको बताते हैं.

एक कथा के अनुसार, एक बार देवताओं के पास अकाल पड़ गया तथा उनके पास खाने-पीने की चीजों का आभाव हो गया था। इस विकट हालात से बचने के लिए भगवान ब्रह्मा जी ने उपाय निकाला कि धरती पर ब्राह्मणों द्वारा खाद्य-सामग्री देवताओं तक पहुंचाई जाए। इसके लिए अग्निदेव का चुनाव किया गया क्योंकि अग्नि में जाने के पश्चात् कोई भी चीज पवित्र हो जाती है।

किन्तु अग्निदेव की क्षमता उस वक़्त भस्म करने की नहीं हुआ करती थी इसीलिए स्वाहा की उत्पत्ति हुई तथा स्वाहा को निर्देश दिया गया कि वे अग्निदेव के साथ रहें। इसके पश्चात् जब भी कोई चीज अग्निदेव को समर्पित की जाती थी तो स्वाहा उसे भस्म कर देवताओं तक पहुंचा देती थीं। तब से आज तक स्वाहा हमेशा अग्निदेव के साथ हैं।

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