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केरल सरकार ने चार महिला भक्तों के सुझाव का किया समर्थन, केरल हाईकोर्ट से कही ये बात

केरल सरकार ने शुक्रवार को चार महिला भक्तों के सुझाव का समर्थन करते हुए केरल हाईकोर्ट से कहा कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को दर्शन के लिए 2 दिन तय किए जाएं। ताकि उन दो दिनों में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाएं दर्शन कर सकें।


सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले के बाद हाईकोर्ट में महिलाओं के मंदिर में दर्शन के लिए पर्याप्त सुरक्षा और सुविधाएं प्रदान करने पर सुनवाई चल रही थी। उसी दौरान राज्य सरकार के अटॉर्नी केवी सोहन ने ये प्रस्ताव पेश किया। अपनी याचिकाओं में इन महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश के लिए दो से तीन दिन तय करने की बात कही है।

चीफ जस्टिस ऋषिकेश रॉय की अध्यक्षता वाली पीठ ने त्रावनकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) को आदेश दिया कि वह कोर्ट को इस बात की जानकारी दें कि सबरीमाला में 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के लिए आधारभूत सुविधाओं और सुरक्षा उपायों की क्या स्थिति है। साथ ही टीडीबी को 7 दिनों के भीतर अपना बयान दर्ज करने को भी कहा गया है।

कन्नूर की रेशमा निशांत और अन्य तीन महिलाओं ने अपनी याचिका में मंदिर में प्रवेश की इच्छा व्यक्त की है। उनका कहना है कि वह मंदिर में प्रवेश करना चाहती हैं, लेकिन वहां चल रहे प्रदर्शन के कारण ऐसा नहीं कर पा रही हैं। इनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब दो समुहों के बीच युद्ध चल रहा हो तो महिलाओं को ऐसी परेशानी भरी जगह पर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

सबरीमाला में पुलिस अत्याचारों का आरोप लगाते हुए याचिकाओं के एक और समूह को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने केरल सरकार से कहा कि जितना जल्दी हो सके सबरीमाला में पहले जैसी सामान्य स्थिति लेकर आएं। साथ ही प्रदर्शनकारियों को भी चेतावनी दी जाए कि वह कानून को अपने हाथों में न लें। इसके अलावा कोर्ट ने याचिकाओं पर देरी से प्रतिक्रिया देने के कारण अधिकारियों के प्रति निराशा व्यक्त की।

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