Breaking News

‘पाखंडी बाबाओं’ के आश्रम को बंद करने वाली सभी याचिकाओं पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया सख्त इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें स्वयंभू बाबाओं के आश्रमों पर कार्रवाई की मांग की गई थी, खासतौर पर वे आश्रम जहां महिलाओं को बंधक बनाकर रख लिया जाता है।

तेलंगाना के रहने वाले याचिकाकर्ता दुमपला रामारेड्डी की तरफ से कोर्ट को बताया था कि इस तरह के 17 आश्रमों को खुद अखाड़ा परिषद फर्जी करार दे चुका है. वीरेंद्र देव दीक्षित, आसाराम, राम रहीम, राधे माँ समेत ऐसे कई आश्रमों के संचालक गंभीर अपराध के लिए या तो जेल में बंद हैं, या फरार हैं. लेकिन उनके सहयोगी अब भी आश्रमों को चला रहे हैं. वहां बड़ी संख्या में महिलाओं और दूसरे लोगों को गुमराह करके रखा गया है.

याचिकाकर्ता रेड्डी ने बीते साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। रेड्डी का कहना है कि उनकी बेटी को दिल्ली के रोहिणी में अध्यात्मिक विद्यालय आश्रम में बंदी बना लिया गया है। यह आश्रम विरेंद्र देव दीक्षित ने बनाया है, जो खुद 1999 में एक नाबालिग से बलात्कार के आरोप में फरार चल रहा है।

इस तरह के फ़र्ज़ी आश्रमों में भी लोगों के रहने की उचित व्यवस्था नहीं है. वहां कोरोना फैलने का अंदेशा बना हुआ है. इसलिए, इन्हें खाली करवाना बहुत ज़रूरी है. तब कोर्ट ने सॉलिसीटर जनरल को याचिका पर जवाब देने को कहा तंग.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *