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SC/ST संशोधन पर सुप्रीम न्यायालय में अहम सुनवाई

 SC/ST संशोधन कानून के विरूद्ध दायर याचिकाओं पर सुप्रीम न्यायालय आज यानि मंगलवार को सुनवाई करेगा जस्टिस एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी दरअसल, इससे पहले केंद्र गवर्नमेंट ने सुप्रीम न्यायालय में अपना जवाब दाखिल कर SC/ST एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान जोड़ने के निर्णय का बचाव किया था केंद्र ने सुप्रीम न्यायालय में हलफनामा दायर कर बोला था कि अब भी भेदभाव की घटनाएं हो रही है  अधिकारों से वंचित किया जाता है, ऐसे में SC/ST के दुरुपयोग के चलते कानून रद्द कर देना गलत है केंद्र गवर्नमेंट ये भी बोला था कि कानून में परिवर्तन का मकसद राजनीतिक फायदा नहीं है

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याचिकाकर्ता ने कानून के अमल पर रोक लगाने की मांग की थी
बताते चलें कि सुप्रीम न्यायालय ने केंद्र गवर्नमेंट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था याचिकाकर्ता ने कानून के अमल पर रोक लगाने की मांग की थी जिसपर न्यायालय ने बोलाथा कि गवर्नमेंट का पक्ष सुने बिना कानून के अमल पर रोक नहीं लगाई जा सकती आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि दो एडवोकेट प्रिया शर्मा, पृथ्वीराज चौहान  अन्य ने जनहित याचिका दायर की थी याचिका में सुप्रीम न्यायालय के 20 मार्च के निर्णय को निष्प्रभावी बनाने के केंद्र गवर्नमेंट के एससी-एसटी संशोधन कानून 2018 को चुनौती दी गई है साथ ही याचिका में एससी-एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक को बहाल करने की मांग की गई है

सरकार का नया कानून असंवैधानिक- याचिका
याचिका में बोला गया है कि गवर्नमेंट का नया कानून असंवैधानिक है, क्योंकि गवर्नमेंट ने सेक्‍शन 18ए के जरिए सुप्रीम न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी बनाया है, जोकि गलत है  गवर्नमेंट के इस नए कानून आने से अब निर्दोष लोगों को फिर से फंसाया जाएगा याचिका में ये भी बोला गया है कि सुप्रीमकोर्ट गवर्नमेंट के नए कानून को असंवैधानिक करार दे जब तक ये याचिका सुप्रीम न्यायालय में लंबित रहे, तब तक न्यायालय नए कानून के अमल पर रोक लगाए आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि राष्ट्रपति ने सुप्रीम न्यायालयका निर्णय निष्प्रभावी करने वाले एससी एसटी संशोधन कानून 2018 को मंजूरी दी थी राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद एससी एसटी कानून पूर्व की तरह कठोर प्रावधानों से लैस हो गया है

ये है गवर्नमेंट का संशोधन कानून 
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद संशोधन कानून प्रभावी हो गया है इस संशोधन कानून के जरिये एससी एसटी अत्याचार निरोधक कानून में धारा 18 ए जोड़ी गई है जो कहती है कि इस कानून का उल्लंघन करने वाले के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है और न ही जांच ऑफिसर को गिरफ्तारी करने से पहले किसी से इजाजत लेने की आवश्यकता है संशोधित कानून में ये भी बोला गया है कि इस कानून के तहत क्राइम करने वाले आरोपी को अग्रिम जमानत के प्रावधान (सीआरपीसी धारा 438) का फायदा नहीं मिलेगा यानि अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी संशोधित कानून में साफ बोला गया है कि इस कानून के उल्लंघन पर कानून में दी गई प्रक्रिया का ही पालन होगा

क्या था सुप्रीम न्यायालय का फैसला 
सुप्रीम न्यायालय ने 20 मार्च को दिए गए निर्णय में एससी एसटी कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए दिशा आदेश जारी किए थे सुप्रीम न्यायालय ने बोला था कि एससी एसटी अत्याचार निरोधक कानून में शिकायत मिलने के बाद तुरंत मामला दर्ज नहीं होगा डीएसपी पहले शिकायत की प्रारंभिकजांचकरकेपता लगाएगा कि मामला झूठा या दुर्भावना से प्रेरित तो नहीं है इसके अतिरिक्त इस कानून में एफआईआर दर्ज होने के बाद अभियुक्त को तुरंत अरैस्ट नहीं किया जाएगा सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले सक्षम ऑफिसर  सामान्य आदमी की गिरफ्तारी से पहले एसएसपी की मंजूरी ली जाएगी इतना ही नहीं न्यायालय ने अभियुक्त की अग्रिम जमानत का भी रास्ता खोल दिया था सुप्रीम न्यायालय के इस निर्णय के बाद देशव्यापी विरोध हुआ था, जिसके बाद गवर्नमेंट ने कानून को पूर्ववत रूप में लाने के लिए एससी एसटी संशोधन बिल संसद में पेश किया था  दोनों सदनों से बिलपास होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था

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