Breaking News

सीवीसी ने आलोक वर्मा पर सौंपी रिपोर्ट

इंडिया की ख़बर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच रिपोर्ट के कुछ तथ्यों को आपत्तिजनक बताते हुए आगे भी जांच की ज़रूरत बताई है.

Image result for सीवीसी ने आलोक वर्मा पर सौंपी रिपोर्ट

कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में वर्मा को क्लिन चिट नहीं दी गई है. सीवीसी ने कुछ संवेदनशील मामलों में ‘गंभीर अनियमितताओं’ को लेकर आलोक वर्मा की कथित भूमिका की बात की है जो कोर्ट को मामले की पूरी जांच के लिए प्रेरित करता है.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि रिपोर्ट को चार हिस्सों में बांट सकते हैं.

पहला, कुछ तथ्य वर्मा के लिए सकारात्मक है. दूसरा, कुछ तथ्य वर्मा के पक्ष में हैं लेकिन मजबूत नहीं हैं. तीसरा, कुछ तथ्य वर्मा के ख़िलाफ़ अति आपत्तिजनक हैं. चौथा, कुछ तथ्यों की आगे जांच की ज़रूरत है.

इस संबंध में आलोक वर्मा को सोमवार को दोपहर 1 बजे तक सीलबंद लिफाफे में जवाब दाखिला करने का निर्देश दिया है.

इस मामले में अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी. आलोक वर्मा को भ्रष्टाचार के आरोपों में छुट्टी पर भेज दिया गया था.

पीठ ने हर हालत में रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कहा है.

असम में मिल सकता है वर्क प​रमिट

हिंदुस्तान टाइम्स में ख़बर है कि असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) में जिन लोगों का नाम नहीं आ पाया है, सरकार उन्हें वर्क प​रमिट देने के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर रही है.

अगर ये प्रस्ताव स्वीकार और लागू हो जाता है तो वो लोग भारत में ही रहकर काम कर सकेंगे जिनका नाम एनआरसी में नहीं है. हालांकि, उन्हें भारत में वोट देने का अधिकार नहीं होगा.

यह प्रस्ताव बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के उन बयानों से बिल्कुल अलग है जिसमें उन्होंने अवैध प्रवासियों को असम से निकालने की कसम खाई थी.

अख़बार ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा है, ”कोई भी देश उन्हें स्वीकार नहीं करेगा. ये लोग कहां जाएंगे. उनके लिए कोई विकल्प तो न

अंकिव बसोया का दाखिला रद्द

दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय ने फर्जी डिग्री मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे अंकिव बसोया का दाखिला रद्द कर दिया है.

इससे एक दिन पहले अंकिव बसोया को एबीवीपी ने निलं​बित कर दिया था और उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा भी दे दिया था.

बौद्ध अध्ययन विभाग के प्रमुख केटीएस सराव ने रजिस्ट्रार को लिखित में यह सूचना दी है. अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि तिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी से अंकिव की डिग्री के फर्जी होने की पुष्टि होने पर बौद्ध अध्ययन विभाग ने यह कदम उठाया है.

विश्वविद्यालय ने दिल्ली पुलिस को भी दाखिला रद्द करने की सूचना दे दी है.

अंकिव बसोया करीब दो महीने वाले छात्रसंघ के अध्यक्ष पद का चुनाव जीते थे. इसके बाद एनएसयूआई ने उनकी डिग्री फर्जी होने की शिकायत की थी.

सज्जन कुमार के ख़िलाफ़ गवाही

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले की शुक्रवार को सुनवाई हुई. इस दौरान एक महिला गवाह ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को कोर्ट में पहचाना और स्पष्ट कहा कि सज्जन कुमार भीड़ को मारने के लिए उकसा रहे थे.

महिला गवाह पहले पटियाला हाउस कोर्ट में ये अर्जी भी लगा चुकी हैं कि उनको गवाही से रोकने के लिए धमकी दी गई थी और पैसे की पेशकश भी की गई थी.

उन्होंने बताया कि 1 नवंबर 1984 को सुल्तापुरी इलाके में भीड़ को सज्जन कुमार ने उकसाया था और उसके बाद भीड़ ने उनके घर में आग लगा दी थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *