Breaking News

सिख दंगा नही मिला मुआवजा, एक माह में मांगा जवाब

1984 में हुए सिख विरोधी दंगे के पीड़ित कई सिख परिवारों को घटना के 34 वर्ष बाद भी मुआवजा नहीं मिल पाया गया है. पीलीभीत  बरेली के दंगा पीड़ितों ने इस मामले में न्यायालय में याचिका दाखिल की है. याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति भारती सप्रू  न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की पीठ ने केंद्र  राज्य गवर्नमेंट से एक माह में जवाब मांगा है.
Image result for सिख दंगा नहीं मिला मुआवजा, एक माह में मांगा जवाब
याची प्यारा सिंह  हरपाल सिंह के अधिवक्ता दिनेश राय के मुताबिक दंगाइयों ने प्यारा सिंह की पत्नी  पुत्री की मर्डर कर दी थी तथा घर में आग लगा दी. दोनों की लाशें जलते हुए घर में फेंक दी गई. आग में कई मवेशी भी मर गए थे. गवर्नमेंट की ओर से मृतकों के लिए 20  घायलों के लिए 10 हजार रुपये की सहायता ही दी गई है.

पूरा मुआवजा आज तक नहीं मिला. इसी प्रकार से हरपाल सिंह के घर में भी आग लगाकर उनके पिता को उसमें फेंक कर मार दिया गया. उसकी मां को बुरी तरह से मारा गया जिससे वह मरणासन्न हो गई. कई मवेशी आगजनी में मर गए.

गवर्नमेंट ने नौ लाख 45 हजार रुपये मुआवजे की घोषणा की थी मगर, मृतक के लिए 20  घायलों के लिए 10 हजार रुपये की सहायता ही दी गई. अधिवक्ता दिनेश राय का कहना था केंद्र गवर्नमेंट ने 16 जनवरी 2006 को पुनर्वास नीति घोषित की.

इसके तहत मृतक के लिए तीन लाख रुपये  घायल के लिए एक लाख 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश राज्यों को दिया गया. यह भी घोषणा की गई कि संपत्ति के नुकसान का दस गुना मुआवजा दिया जाएगा. केंद्र की नीति को राज्यों ने भी स्वीकार किया.

याचीगण को फरवरी 2015 में पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया मगर उनका दावा आयुक्त सिख विरोधी दंगा कानपुर मंडल के यहां से 34 वर्ष बाद भी निस्तारित नहीं हो सका है. इसलिए याचिका दाखिल की गई है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *