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बाल गृहों में शोषण पर जिलाधिकारी को संस्था के मिले यह अधिकार

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल सुधार गृहों  शेल्टर होम (आश्रय घर) में बच्चों के साथ होने वाले शोषण के मामलों में तत्काल असर से संस्था के समस्त अधिकार जिलाधिकारी (डीएम) को प्रत्यक्ष प्रभार में लेने को बोला है. बाल आश्रय  सुधार गृहों में लगातार अनियमितताओं की शिकायतों को देखते हुए मंत्रालय ने यह दिशा-निर्देश वाली एडवाइजरी जारी की है.
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एडवाइजरी में बोला गया कि जिलाधिकारी को यह अधिकार होगा की वह तुरंत ऐसे मामलों में व्यवस्था को संभाले. जिन बच्चों के साथ शोषण हुआ है  उसकी शिकायत पर उन्हें चौबीस घंटे के भीतर काउंसलिंग से लेकर इलाज तक की सुविधा उपलब्ध करना जरूरी होगा.

मनोवैज्ञानिक पैनल गठित करने का भी अधिकार

इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी को यह अधिकार होगा कि वह स्वयं मनोवैज्ञानिक पैनल का गठन करें या इस तरह के बच्चों की देखभाल में सक्षम संस्थानों को जोड़े. जिलाधिकारी को यह भी निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है कि वह संस्थान के प्रबंधन  कर्मचारियों को पूरी तरह से या बच्चों की सुविधा के अनुसार बदले.

एडवाइजरी के अनुसार आवश्यकता के मुताबिक बच्चों का जगह बदलाव भी किया जा सकता है. लेकिन जिला प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह के बच्चों की पहचान उजागर न हो. मंत्रालय ने बोला कि बाल आश्रय गृहों में दुर्व्यवहार के मामले में घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिला प्रशासन को काम योजना तैयार करने में मदद करने का अधिकार होगा.

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