हज हाउस भी डूब क्षेत्र में, नियम-कानून पर उठे सवाल; 46 साल बाद लौटेगी तबाही

सिंचाई विभाग हर साल अलर्ट जारी करता है, लोग मानते नहीं

दिल्ली के नजदीक गाजियाबाद में बाढ़ का खतरा चिंताजनक है। यमुना और हिंडन नदी का जलस्तर बढ़ने से सरकारी तंत्र को एक्शन मोड में आना पड़ा है। संभावित खतरे को ध्यान में रखकर आवश्यक कदम उठाए जाने लगे हैं। लोनी क्षेत्र में ज्यादा हलचल दिखाई दे रही है। कुछ गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

हिंडन से सटे करहैड़ा गांव में भी डर एवं चिंता का आलम है। मौसम विभाग ने सितम्बर माह में अधिक बारिश होने का अनुमान जाहिर किया है। सितम्बर के शुरुआती दिनों में मौसम का मिजाज बाढ़ की आशंका को बढ़ा रहा है। ऐसे में अतीत का चुनौतीपूर्ण वक्त याद आने लगा है।

बात 1978 की है। जब गाजियाबाद को बाढ़ के भयंकर मंजर का सामना करना पड़ा था। उस समय बाढ़ का पानी नया बस अड्डा के समीप तारा की प्याऊ तक पहुंच चुका था। हिंडन पुल डूब गया था। साहिबाबाद और गाजियाबाद शहर के बीच लगभग पंद्रह दिन तक संपर्क टूटा रहा था। हिंडन के आसपास की कॉलोनियां तालाब बन गई थीं।

जिला प्रशासन के नेतृत्व में सिविल डिफेंस की टीम ने नाव के जरिए बाढ़ में फंसे नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद की थी। ज्ञानी बॉर्डर से पटेल नगर तक, आनंद विहार से मोहन नगर तक, राष्ट्रीय राजमार्ग-24 (अब एनएच-9) का अधिकांश हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था। 46-47 साल पुराने उन दिनों को याद कर बढ़े-बुजुर्ग आज भी सिहर उठते हैं। तब आबादी बेशक कम थी, मगर बाढ़ से बचाव के साधन भी सीमित थे। वर्तमान में आबादी काफी अधिक बढ़ चुकी है।

गाजियाबाद में न सिर्फ सैकड़ों की तादाद में अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं बल्कि हिंडन के डूब क्षेत्र तक में पक्के आशियाने बना लिए गए हैं। आला हजरत हज हाउस की इमारत भी डूब क्षेत्र में आती है। डूब क्षेत्र में पक्का निर्माण करना गैरकानूनी है, मगर हिंडन किनारे की हालत देखकर ऐसा लगता है कि देश की राजधानी के समीप इस शहर में नियम-कानून कोई मायने नहीं रखते हैं। सिंचाई विभाग प्रतिवर्ष मानसून के मौसम में डूब क्षेत्र को लेकर अलर्ट जारी करता है। अलर्ट के जरिए उन नागरिकों को आगाह किया जाता है जो डूब क्षेत्र में मकान बनाकर रहे रहे हैं।

हालांकि सिंचाई विभाग की सलाह या चेतावनी का कोई असर नहीं पड़ता। पिछले साल यमुना और हिंडन के जलस्तर में वृद्धि होने से लोनी के कई गांवों के अलावा साहिबाबाद क्षेत्र का करहैड़ा गांव, न्यू करहैड़ा कॉलोनी में डूब क्षेत्र में बाढ़ का पानी घुस गया था। करहैड़ा में बाढ़ के कारण जान-माल का नुकसान भी हुआ था। इसके बावजूद नागरिकों ने कोई सबक नहीं लिया।

डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण के लिए जितने जिम्मेदार भवन स्वामी हैं, उससे अधिक दोषी वह अधिकारी और कर्मचारी हैं, जिनके कार्यकाल में वहां नियमों का मखौल उड़ाया गया था।

डूब क्षेत्र में दिन-रात अवैध निर्माण होता रहा और जिम्मेदार अधिकारी आंखे मूंदकर बैठे रहे। अवैध कॉलोनियां भी सरकारी लापरवाही का जीता जागता प्रमाण हैं।

हिंडन का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने पर निश्चित रूप से सबसे ज्यादा नुकसान डूब क्षेत्र में बसी आबादी को उठाना पड़ सकता है। सिर पर बाढ़ का खतरा मंडराने के बाद भी इस क्षेत्र में हजारों परिवार रोजमर्रा की जिंदगी गुजारते नजर आ रहे हैं।

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