विश्व आईवीएफ दिवस: समय पर जांच और सही उपचार से मातृत्व का सपना हो सकता है साकार

गाजियाबाद। विश्व आईवीएफ दिवस के अवसर पर गणेश अस्पताल की चेयरपर्सन एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना शर्मा ने कहा कि आधुनिक आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक ने संतान सुख से वंचित दंपतियों के लिए नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, सही निदान और विशेषज्ञ की देखरेख में उपचार से गर्भधारण की संभावना काफी बढ़ जाती है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली, अनियमित खानपान, बढ़ती उम्र और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण बांझपन के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि कोई दंपति एक वर्ष तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पाता है, तो उसे बिना देरी किए स्त्री एवं पुरुष दोनों की जांच करानी चाहिए। वहीं, यदि महिला की आयु 35 वर्ष से अधिक है, तो छह महीने तक गर्भधारण न होने पर ही विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।

डॉ. शर्मा ने कहा कि आईवीएफ एक वैज्ञानिक और सुरक्षित तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का प्रयोगशाला में निषेचन कर भ्रूण तैयार किया जाता है और फिर उसे गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह तकनीक उन दंपतियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जिनमें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण संभव नहीं हो पाता।

उन्होंने बताया कि फैलोपियन ट्यूब का बंद होना, पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी या गुणवत्ता में गिरावट, एंडोमेट्रियोसिस, बढ़ती उम्र, बार-बार गर्भपात या लंबे समय तक गर्भधारण न होने जैसी परिस्थितियों में आईवीएफ प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।

डॉ. अर्चना शर्मा ने समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि संतान न होने पर निराश होने या अवैज्ञानिक उपाय अपनाने के बजाय योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा तनावमुक्त जीवन को भी प्रजनन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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