ओणम कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है, जानें पौराणिक कहानी

ओणम उत्सव में क्या खास होता है, जानिए 10 दिनों की परंपरा

Onam 2025: क्या आप जानते हैं कि ओणम केवल एक त्योहार नहीं बल्कि केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है? ये त्योहार हर साल मलयाली समुदाय द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। ओणम फसल उत्सव, भक्ति और साम्प्रदायिक सद्भाव का मेल है जो दस दिनों तक (Onam celebrations) चलता है। आइए जानते हैं इस त्योहार के पीछे की कहानी और इसकी खासियतें।

जानें ओणम का महत्त्व और इतिहास (Onam 2025)

ओणम का मुख्य आधार है महान राजा महाबली की कथा। ऐसा माना जाता है कि उनकी प्रजा के प्रति प्रेम और न्याय के कारण उनकी वापसी से समृद्धि और खुशहाली आती है। भगवान विष्णु के वामन अवतार की कहानी ओणम से जुड़ी है जिसमें वामन ने राजा महाबली को अपनी विनम्रता और भक्ति से प्रभावित होकर एक खास वरदान दिया। यही कारण है कि ओणम का त्योहार उनकी प्रतीकात्मक वापसी के रूप में मनाया जाता है।

ये भी पढ़े- Parivartani Ekadashi 2025 Kab Hai; जानें तिथि, पूजा और पारण समय

थिरुवोनम: ओणम का सबसे शुभ दिन

दस दिनों के ओणम उत्सव में थिरुवोनम (Thiruvonam) सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन राजा महाबली पाताल लोक से अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। लोग अपने घरों को साफ करते हैं और रंग-बिरंगे पुष्पों से सजाते हैं जिसे पूकलम कहा जाता है। पारंपरिक पोशाक पहनकर वे थिरुवथिराकली जैसे लोक नृत्यों और खेलों का आनंद लेते हैं। ये दिन एकता और आशा का संदेश देता है।

ओणम की कहानी में भगवान विष्णु के वामन अवतार का विशेष महत्व है। उन्होंने राजा महाबली से तीन पग जमीन मांगी और अपने दो पगों से धरती और आकाश को मापा। तीसरे पग से उन्होंने महाबली को पाताल लोक भेजा, लेकिन उनकी भक्ति को देखकर हर साल उन्हें अपनी प्रजा से मिलने का अवसर दिया। इस पौराणिक कथा से ओणम का उत्सव जुड़ा है।

कब और कैसे मनाया जाता है ओणम (Onam celebrations)

ओणम मलयालम कैलेंडर के महीने चिंगम में मनाया जाता है जो अगस्त-सितंबर के बीच आता है। ये उत्सव अथम नक्षत्र से शुरू होकर थिरुवोनम तक चलता है। इस दौरान फूलों की सजावट, भव्य भोज, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक खेलों का आयोजन होता है। ये त्योहार केरल की समृद्धि, समानता और सांस्कृतिक गौरव का जश्न है।

Related Articles

Back to top button