Pitru Paksha 2025: क्या होता है श्राद्ध न करने से, जानिए पितृदोष का प्रभाव
पितृ पक्ष 2025: क्या आप निभा रहे हैं अपना धर्मिक कर्तव्य

Pitru Paksha 2025: भाद्रपद मास का कृष्ण पक्ष, जिसे पितृ पक्ष कहा जाता है, पूर्वजों को श्रद्धा व कृतज्ञता अर्पित करने का विशेष काल होता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है क्योंकि यह समय हमारे दिवंगत पितरों को याद कर, उनके लिए श्राद्ध व तर्पण करने का होता है। मान्यता है कि इन 16 दिनों में हमारे पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण की अपेक्षा रखते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चाहे हम कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाएं, धार्मिक कर्तव्यों की उपेक्षा उचित नहीं है। जिन पूर्वजों की संपत्ति, नाम और रिश्तों का हम लाभ उठाते हैं, उनके प्रति कृतज्ञता जताने के लिए श्राद्ध जरूरी है। ये केवल एक कर्मकांड नहीं बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक कार्य भी है।
जानें श्राद्ध ना करने से क्या होता है (Pitru Paksha 2025)
श्राद्ध न करने से पितृदोष उत्पन्न हो सकता है, जिससे परिवार में कलह, बीमारियां, असंतोष और रिश्तों में टूटन आ सकती है। कई बार हम कहते हैं कि कुछ लोग बिना पूजा-पाठ के भी सुखी हैं, लेकिन वे अपने पूर्व जन्मों के पुण्य का फल भोग रहे होते हैं जो एक दिन खत्म हो जाएगा।
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यदि किसी को पूर्वजों की तिथि न पता हो तो हर अमावस्या को श्राद्ध किया जा सकता है। इस परंपरा का धार्मिक ही नहीं, मनोवैज्ञानिक महत्व भी है ये हमें मन की शांति और संतोष देता है।
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अंततः श्राद्ध हमारे लिए एक अवसर है अपने पूर्वजों का आभार जताने का, उनका आशीर्वाद पाने का और अपनी अगली पीढ़ी को भी इस परंपरा का महत्व सिखाने का। इसे अनदेखा करना नासमझी और भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है।



