लालू का ‘बिखरता कुनबा’, मुलायम परिवार वाला किस्सा दोहराया

बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की शर्मनाक हार के बाद लालू यादव के परिवार की आंतरिक खुलकर सामने आ गई है। तेज प्रताप यादव के बाद रोहिणी आचार्य ने लालू परिवार से नाता तोड़कर दूरी बना ली है। बूढ़े एवं बीमार लालू का कुनबा धीरे-धीरे बिखर रहा है। इसके बावजूद वह कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

लालू यादव की हालत महाभारत के भीष्म पितामह और धृतराष्ट्र जैसी नजर आती है। दृष्टिहीन धृतराष्ट्र देख नहीं सकते थे, मगर हालात के बारे में जान व सुन सकते थे। जबकि भीष्म पितामह बुराई को देखने एवं सुनने के बाद भी मौन धारण किए रहे थे। बिहार में राजद को अस्तित्व में लाने तथा मजबूत बनाने में लालू यादव ने कड़ी मेहनत की थी।

रोहिणी आचार्य ने जो त्याग दिया वो अमूल्य

वर्तमान में इस पार्टी और परिवार पर तेजस्वी यादव का एकाधिकार दिखाई पड़ता है। अपने कुछ करीबियों का वह मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। इन करीबियों की वजह से लालू के परिवार में लंबे समय से कलह चल रही है। पिता लालू यादव की जिंदगी बचाने के लिए रोहिणी आचार्य ने जो त्याग एवं बलिदान दिया, वह अमूल्य है। बेटी की किडनी के सहारे लालू अब तक जिंदा हैं। बदले में रोहिणी को क्या मिला? उन्हें अपमान का कड़वा घूंट पीकर अपना मायका छोड़ना पड़ा। रो-रोकर उन्होंने अपनी पीड़ा को जाहिर किया।

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मायके में रोहिणी के साथ जिस प्रकार का बर्ताव किया गया, वह कतई उचित नहीं है। रोहिणी के आरोपों से एक बात स्पष्ट है कि तेजस्वी यादव अब पूरी तरह से संजय यादव और रमीज के हाथों की कठपुतली बन चुके हैं। रमीज का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। सबसे अफसोसजनक बात यह कि कैसे कोई भाई दूसरों के बहकावे में आकर अपनी बहन का अपमान कर सकता है।

अखिलेश ने सपा पर एकाधिकार जमाने के लिए दे दी थी कुर्बानी

पूर्व सीएम लालू यादव के घर का किस्सा यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुलायम सिंह यादव के परिवार की रार से मेल खाता नजर आता है। याद कीजिए उस समय को जब अखिलेश यादव ने सपा पर एकाधिकार जमाने के लिए खून के रिश्तों की तिलांजलि दे डाली थी। मुलायम सिंह को अनसुना व नजरअंदाज कर उन्होंने सपा पर कब्जा कर लिया था। इसके चलते चाचा शिवपाल यादव लंबे समय तक सपा से दूर रहे थे। वैसे मुलायम परिवार में कलह की वजह अमर सिंह को माना जाता था।

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कभी अखिलेश ने अपने बड़ों का अपमान किया था, जबकि आज तेजस्वी यादव भी ऐसा ही कर रहे हैं। अखिलेश यादव बेशक सपा में सर्वेसर्वा बन चुके हैं, मगर पुन: मुख्यमंत्री बनने का उनका सपना अभी अधूरा है। जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव का अहंकार भी उन्हें अर्श से फर्श पर ला चुका है। कहा जाता है कि परिवार की एकजुटता में बड़ी ताकत होती है।

कोई भी संगठित परिवार बड़ी से बड़ी चुनौती को मात देने में सक्षम होता है। इसके विपरीत यदि परिवार में अलगाव हो जाए तो एक के बाद एक समस्या हावी होने लगती है। तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्य के झगड़े के उपरांत बिहार की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गरम है। कोई पूरे मामले पर तंज कस रहा है तो कोई परिवार में विवाद पर चिंता जाहिर कर रहा है। सोशल मीडिया के जरिए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी अपना पुराना दुख जाहिर किया है। चिराग ने कहा कि वह भी इस तरह की पीड़ा का सामना कर चुके हैं।

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