ट्रंप ने कर दिया बुरा हाल; बुनियादी जरूरतों के लिए बाल, परफ्यूम और पुराने जूते बेचने को मजबूर हुए लोग

Iran economic crisis 2026: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब कूटनीति के दायरे से निकलकर आम इंसानों के घरों में घुस चुकी है। इस लंबे संघर्ष और आर्थिक पाबंदियों ने ईरान के बाजार का नक्शा ही बदल दिया है।
हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि वहां के लोग अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए अपने घरों का निजी सामान और इस्तेमाल की हुई चीजें बेचने या किराए पर उठाने की लाचारी झेल रहे हैं।
जब बाल और परफ्यूम बेचकर चलाना पड़े घर
ईरान की एक प्रमुख समाचार एजेंसी आईएलएनए की हालिया रिपोर्ट बताती है कि वहां के नागरिकों ने पैसे कमाने के अजीबोगरीब रास्ते ढूंढ लिए हैं। लोग अपने असली बाल पुराने लैपटॉप इस्तेमाल किए हुए इत्र के डिब्बे और यहां तक कि पहनने वाले पुराने जूते भी ऑनलाइन बेच रहे हैं। कुछ लोग तो इन चीजों को बेचने के बजाय थोड़ा बहुत किराया वसूलने के विकल्प पर भी काम कर रहे हैं ताकि किसी तरह चूल्हा जल सके।
मजबूरी से जन्मी नई अर्थव्यवस्था
इस बुरे दौर ने देश में एक नया ही आर्थिक चक्र पैदा कर दिया है जिसे जीने की मजबूरी का मॉडल कहा जा रहा है। परिवार अब उन छोटी-छोटी चीजों को भी बेचकर नकद पैसा जुटा रहे हैं जिन्हें कभी कोई भाव नहीं देता था। बाजार में अब कई विक्रेता छोटे-छोटे सामानों का एक बंडल बनाकर बेच रहे हैं ताकि चीजें जल्दी बिक जाएं और तुरंत हाथ में पैसे आ जाएं।
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बाजार में पैसों की भयंकर किल्लत है जिसके चलते किराए पर लैपटॉप लेने का चलन बहुत बढ़ गया है। छात्र और दफ्तर के लोग नया लैपटॉप खरीदने के बजाय किराए पर काम चला रहे हैं। दूसरी ओर महंगाई के आंकड़े डराने वाले हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वहां सालाना महंगाई दर छासठ प्रतिशत के पार निकल चुकी है जबकि साल दर साल के हिसाब से यह लगभग अठ्ठासी प्रतिशत तक पहुंच गई है। खाने-पीने की चीजें इतनी महंगी हो गई हैं कि लोगों ने दवाइयों और इलाज के खर्च में भी कटौती करनी शुरू कर दी है।



