गोवर्धन पूजा से प्रकृति संरक्षण का मिला संदेश
पूतना वध से अधर्म का अंत,श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के भक्तों ने सुने प्रेरक प्रसंग

जसवंतनगर,इटावा। क्षेत्र के बलरई स्थित प्रसिद्ध चिंताहरण धाम कारसदेव खाटूश्याम मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर श्रद्धा,भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथाव्यास निशांत कृष्ण जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए पूतना वध एवं गोवर्धन पूजा की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि भागवत पुराण के अनुसार पूतना वध केवल एक राक्षसी के संहार की कथा नहीं, बल्कि अधर्म,छल और दुष्ट प्रवृत्तियों पर धर्म की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण ने बाल स्वरूप में ही पूतना का उद्धार कर यह संदेश दिया कि ईश्वर की कृपा से सबसे बड़ा पापी भी मोक्ष का अधिकारी बन सकता है।
गोवर्धन पूजा प्रसंग का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का नाश कर गोवर्धन पर्वत की पूजा कराई और प्रकृति,गौवंश तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्राकृतिक संसाधनों के प्रति कृतज्ञ रहकर उनका संरक्षण करना चाहिए।
कथा में राजा परीक्षित की भूमिका मंदिर के महंत सुनील महाराज एवं उनकी धर्मपत्नी सोनी देवी निभा रहे हैं,जबकि यज्ञपति के रूप में सुरेश डीलर एवं उनकी धर्मपत्नी सीता देवी विराजमान हैं। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आगामी दिनों में कथाव्यास श्रीमद्भागवत के अन्य दिव्य प्रसंगों का रसपान कराएंगे।



