अखिलेश की दुखती रग; यूपी की सियासत में टोंटी चोरी के नाम पर गरमा-गर्मी, सपा का आक्रामक रुख

उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच तल्खी कम होने का नाम नहीं ले रही है। कभी-कभी दोनों के मध्य का विवाद सास-बहू के झगड़े जैसा दिखाई देने लगता है। दोनों दलों में कभी नए तो कभी पुराने मुद्दे पर एकाएक विवाद शुरू हो जाता है। इसके चलते लखनऊ में सियासी पारा चढ़ जाता है।
भाजपा-सपा की लड़ाई कई बार आम जनता के लिए मनोरंजन का साधन बन जाती है। फिलहाल पुराने मुद्दे पर नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। ताजा विवाद की शुरुआत भाजपा की महिला विधायक केतकी सिंह के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘पहले अखिलेश यादव ये बताएं कि जब सीएम आवास छोड़ा था तो टोंटियां कहां गई। अभी तक वो टोंटियां मिली नहीं हैं वापस, सरकारी टोंटियां हैं। विधायक के बयान के विरोध में सपा कार्यकर्ताओं ने उनके आवास का घेराव कर जमकर हंगामा किया था।
कब कब उठता है टोंटी चोरी का मामला
दरअसल यूपी की सियासत में टोंटी चोरी का मामला जब-जब उठता है, तब-तब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का पारा हाई होने लगता है। वह भाजपा के खिलाफ आक्रामक मुद्रा में आ जाते हैं। अखिलेश यादव ने पूर्व आईएएस अवनीश अवस्थी और सीएम के पूर्व ओएसडी अभिषेक कौशिक के प्रति जिस प्रकार की भड़ास निकाली है, उससे यह मामला और तूल पकड़ गया है।
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सपा मुखिया के विरोध में ब्राह्मण समाज
हालांकि सपा मुखिया के विरोध में ब्राह्मण समाज उतर आया है। इस बीच अखिलेश ने यह भी कहा है कि ‘हम टोंटी चोरी के आरोप भूल नहीं सकते, ये बात सरकार जान ले’। यूपी में भाजपा-सपा को एक-दूसरे का प्रबल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। पिछले आठ साल से सूबे की सत्ता से सपा निरंतर बाहर चल रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर सपा ने भाजपा की टेंशन बढ़ाई थी।
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अगले साल पंचायत चुनाव होने हैं। इसके बाद विधानसभा चुनाव की सरगर्मी आरंभ हो जाएगी। इसके मद्देनजर दोनों प्रमुख दल अभी से सियासी नूराकुश्ती तेज करने लगे हैं। सपा की तरफ से विरोधियों को साधने में अखिलेश सबसे आगे रहते हैं। प्रो. रामगोपाल यादव व शिवपाल यादव जैसे कद्दावर नेता यदा-कदा मोर्चा संभालते हैं। जबकि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के अलावा कई विधायक मैदान में उतरने में देर नहीं लगाते हैं।
चर्चा का विषय बने ओमप्रकाश राजभर
हाल ही में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने का मामला सामने आया था। जिस पर मंत्री ओमप्रकाश राजभर की आपत्तिजनक टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया था। भाजपा के कई नेताओं ने राजभर को करार जवाब देकर बैकफुट पर ला दिया था। देश के सबसे बड़े राज्य में अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए सपा भरसक प्रयास कर रही है। भाजपा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा भाजपा को माना जाता है।
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चूंकि यूपी में कांग्रेस और बसपा की हालत खस्ता है। कांग्रेस के दिन बहुरने की उम्मीद दूर दूर तक नजर नहीं आती है। जबकि बसपा को मजबूत करने की खातिर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती एक बार फिर सक्रिय हो रही हैं। आगामी पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर उन्होंने रणनीति पर काम आरंभ कर दिया है।
इसके इतर सपा और भाजपा में टकराव कभी रूक पाएगा, इसकी संभावना दिखाई नहीं दे रही। टोंटी चोरी विवाद पर अखिलेश यादव का गरम रूख इस बात के संकेत हैं कि भविष्य में यदि वह सत्ता में लौटते हैं तो राजनीतिक विरोधियों की खैर नहीं होगी। चाहे वह राजनीति से जुड़े व्यक्ति हों या सरकारी तंत्र से संबंध रखने वाले अधिकारी या कर्मचारी।



