धार्मिक ग्रंथ हमारी भारतीय संस्कृति की धरोहर हैं: महामण्डलेश्वर
ग्वालियर से पधारे महामण्डलेश्वर स्वामी सन्तोषानन्दजी महाराज ने दिया भक्तों को संदेश

भरथना,इटावा। धर्मशास्त्र,पुराण, भगवतगीता,वेद, रामायण हमारी धरोहर हैं। इन्हें संभालना व संरक्षण देकर दैनिक जीवन में उपयोग कर इनका प्रचार-प्रसार करना हमारा दायित्व है। हमारी पीढियों को सद्मार्ग की ओर उन्मुख कर उन्हें संस्कारवार बनाने की शक्तियां इनमें विद्यमान हैं।
उक्त बात कस्बा के विधूना रोड स्थित शक्तिपीठ श्री बालरूप हनुमान जी महाराज हनुमान गढी (छोला मन्दिर) पर बुढवा मंगल के उपलक्ष्य में आयोजित 45वें मंगल महोत्सव के दौरान पहुँचे महामण्डलेश्वर स्वामी सन्तोषानन्दजी महाराज (ग्वालियर) ने कही। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से राम नाम का सुमिरन मात्र से ही हम पवनसुत वीर हनुमानजी का आर्शीवाद प्राप्त कर सकते हैं। स्वामी जी ने कहा कि धर्मग्रन्थों में ज्ञान का भण्डार है, इनके सम्मान के लिए हमें सदैव तत्पर व अग्रणी रहना चाहिये। इस मौके पर मन्दिर प्रबन्धक राजू चौहान, राजेश चौहान, अध्यक्ष रूपकिशोर गुप्ता रूपे, संजीव श्रीवास्तव, अमित मिश्रा, राहुल दीक्षित, आविद अली, जितेन्द्र सिंह राजावत, रिंकू चौहान, चचुआ पोरवाल सहित सैकडों गणमान्य लोगों व श्रद्धालुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।



