पति का साथ छूटा तो नहीं टूटा हौसला, 5 हजार से शुरू किया कारोबार, आज पूजा सामग्री की दुकान की मालकिन हैं बबीता

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में गाजियाबाद की बबीता शर्मा के संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी साझा की

गाजियाबाद। मुश्किल हालात इंसान को तोड़ सकते हैं, लेकिन नंदग्राम की रहने वाली बबीता शर्मा ने परिस्थितियों को अपनी ताकत बना लिया। पति का साथ छूटने के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक संकट के बीच घर में बचे महज 5 हजार रुपये से उन्होंने पूजा सामग्री बेचने का छोटा सा कारोबार शुरू किया।

बबीता ने सड़क किनारे ठेली लगाकर फूल, दीये, अगरबत्ती, नारियल सहित अन्य पूजा सामग्री बेचना शुरू किया। मेहनत, लगन और हौसले के साथ उन्होंने अपने छोटे से कारोबार को आगे बढ़ाया। इसी दौरान प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने उनके कारोबार को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

धीरे-धीरे सड़क किनारे लगी उनकी ठेली ने एक दुकान का रूप ले लिया। आज बबीता नंदग्राम में मंदिर के पास पूजा सामग्री की दुकान चला रही हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियां स्वयं संभाल रही हैं।

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने किया जिक्र

बबीता शर्मा के संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में साझा की। प्रधानमंत्री ने उनके संघर्ष का उल्लेख करते हुए बताया कि बबीता ने बेहद कम पूंजी से शुरुआत की और अपनी मेहनत के दम पर कारोबार को आगे बढ़ाया।

बबीता की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने पैरों पर खड़े होकर परिवार की जिम्मेदारी निभाने का हौसला रखती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही आर्थिक सहयोग से मुश्किल परिस्थितियों को भी अवसर में बदला जा सकता है।

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