पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होगी, मोदी सरकार लेने जा रही है ये बड़ा फैसला

petrol diesel row: भारत के फ्यूल रिज़र्व को 90 दिनों की ज़रूरत के हिसाब से बढ़ाने की तैयारी चल रही है, ताकि भविष्य में किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट के समय देश में पेट्रोल या डीज़ल की कमी न हो। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक टास्क फ़ोर्स बनाई है और रणनीतिक व कमर्शियल, दोनों स्तरों पर फ्यूल रिज़र्व को बढ़ाया जाएगा।
केंद्र सरकार ने यह बड़ा फ़ैसला पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव और ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर बढ़ते ख़तरों को देखते हुए लिया है। इसका मकसद रिज़र्व क्षमता को तीन महीने तक बढ़ाना है ताकि भारत—जो आयात पर काफ़ी हद तक निर्भर है— ग्लोबल संकटों के असर से बच सके।
अभी रिज़र्व कहाँ हैं? नए रिज़र्व कहाँ बनाए जाएँगे?
विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में मौजूद रणनीतिक ऑयल रिज़र्व के अलावा, नए अंडरग्राउंड स्टोरेज बनाने की तैयारी चल रही है। चंडीखोल और पादुर में अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता बनाई जाएगी।
इसके अलावा, सरकारी ऑयल कंपनियों को ज़्यादा मात्रा में कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) स्टॉक करने का निर्देश दिया जाएगा। इससे आपातकालीन स्थितियों में भी देश के भीतर फ्यूल की सप्लाई बनी रहेगी।
आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में फिर से शुरू हुए गंभीर संघर्ष ने ग्लोबल फ्यूल सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। सप्लाई में इस रुकावट के कारण फ्यूल की कीमतें बढ़ रही हैं, ऐसे में भारत सरकार ने घरेलू बाजार में ग्राहकों और कंपनियों को बड़ी राहत देने वाला एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने ज़्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी पूरी तरह से हटा दी है।
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केंद्र सरकार ने इस बारे में एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है और इस कदम को पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को स्थिर करने की अपनी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।



