खेल में राजनीति; बांग्लादेश का भारत में मैच न खेलने का फैसला क्यों, जानें अंदर की बात
Bangladesh Cricket Row: खेल और सियासत का कोई मेल नहीं है। दोनों का अलग-अलग रोल होता है। आमतौर पर खेल के जरिए आपसी रिश्तों में मजबूती आती है। इसके इतर राजनीति अलगाव का कारण बनती है। खेल जहां दो देशों की कटुता को दूर करते रहे हैं, वहीं राजनीति से विवाद को बढ़ावा मिलता है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम के ताजा फैसले ने खेल में सियासी दखल की चर्चाओं को बढ़ावा दिया है।
अंतरिम सरकार और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के दबाव के कारण इस मुल्क की टीम का टी-20 वर्ल्ड कप में प्रतिभाग करने का सपना लगभग चकनाचूर हो गया है। खिलाड़ी मायूस हैं, मगर चाहकर भी वह अपने मन की पीड़ा को खुलकर जाहिर नहीं कर पा रहे हैं। वर्ल्ड कप में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए सभी खिलाड़ी लंबे समय से अभ्यास में जुटे थे। ऐन वक्त पर उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा है। टी-20 वर्ल्ड कप की शुरुआत अगले माह से होनी है। टूर्नामेंट के मैच भारत के अलावा श्रीलंका में खेले जाने हैं।
तख्तापलट होने के बाद से बांग्लादेश में हालात खराब
बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर भारत में मैच खेलने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल बांग्लादेश जिस ग्रुप में है, उसके सभी मैच भारत में होने हैं। शेख हसीना सरकार का तख्तापलट होने के बाद से बांग्लादेश में हालात खराब हैं। वहां अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर अत्याचार होने की वजह से बांग्लादेश के भारत संग रिश्ते खराब हो चुके हैं। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस जिस प्रकार के फैसले ले रहे हैं, उससे नई दिल्ली की चिंता व गुस्सा बढ़ना स्वाभाविक है।
पाकिस्तान और चीन के इशारे पर यूनुस भारत विरोधी कदम उठाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। उधर, आईसीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश के शेड्यूल मैच भारत में खेले जाएंगे। यदि बांग्लादेश अपना फैसला नहीं बदलता, तो वर्ल्ड कप में उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया जाएगा। हालांकि आईसीसी ने बांग्लादेश को आखिरी मौका दिया है। राजनीतिक एवं सामाजिक तनाव और अस्थिरता के दौर से गुजरते देश की आवाम के लिए क्रिकेट राहत देने वाला कदम है।
कहां हुई चूक
इस प्रकरण में बात इतनी बिगड़ती नहीं, यदि आरंभ से खेल को खेल की भांति लिया जाता। आईसीसी और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अनेक बार वार्ता की, मगर बात नहीं बन सकी। बांग्लादेश सरकार और बोर्ड इस बात पर अड़े रहे कि टीम भारत में नहीं खेलेगी। बांग्लादेश ने अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा का मसला उठाया है, जबकि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की (आईसीसी) रिपोर्ट ऐसी किसी आशंका को खारिज करती है। असल में यह निर्णय खेल की जमीन पर नहीं, जियो-पॉलिटिक्स की बुनियाद पर लिया गया है, जो सरासर क्रिकेट की भावना के खिलाफ है।
इसका सबसे बड़ा नुकसान खुद बांग्लादेश को होगा, जिसका अंदेशा वहां के सीनियर खिलाड़ी तमीम इकबाल भी जता चुके हैं। टी-20 वर्ल्ड कप से दूरी बनाने से बांग्लादेश को बड़ा नुकसान होने की संभावना जाहिर की गई है। अन्य टूर्नामेंट में भी उसकी भागीदारी पर भविष्य में प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसके अलावा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा। बीसीबी पहले से आर्थिक तंगहाली से जूझ रहा है।
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क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की आय के साधन पहले से प्रभावित हैं। अब वर्ल्ड कप में भाग न लेने की वजह से सभी खिलाड़ियों की आमदनी का बड़ा जरिया भी दूर हो जाएगा। जानकारों का मानना है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा चिंता का मुद्दा उठाकर बांग्लादेश सरकार दरअसल भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने का प्रयास कर रही है।



