किराया 5000 से सीधा 40,000 तक, हाईकोर्ट ने पूछा- लूट मचाने की खुली छूट किसने दी

पिछले कुछ दिनों से इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द होने के बाद जो त्राहि-त्राहि मची उसमें सबसे बड़ा झटका यात्रियों को महंगे टिकटों ने दिया। आम दिनों में 4-5 हज़ार में मिलने वाली सीट अचानक 35 से 40 हज़ार तक बिकने लगी। लाखों लोग एयरपोर्ट पर फंसे रहे और जेब ढीली होती रही।

अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की क्लास लगा दी है। बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस की बेंच ने एक के बाद एक तीखे सवाल दागे।

जानें कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि संकट का फायदा उठाकर दूसरी एयरलाइंस को मनमाना किराया वसूलने की इजाज़त कैसे मिल गई? 40 हज़ार तक टिकट बेचना कहाँ का न्याय है अगर मुसीबत थी तो लूट की छूट क्यों दी गई।

अदालत ने साफ कहा कि मामला सिर्फ़ उड़ान रद्द होने या देरी का नहीं है। इसमें यात्रियों का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और पूरी व्यवस्था में बड़ी खामी दिख रही है।

सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बचाव करते हुए कहा कि किराए पर कैप लगा दी गई है और यह अपने आप में सख्त कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि इंडिगो ने खुद ही जुलाई और नवंबर के लिए लागू होने वाले नए पायलट ड्यूटी नियमों (FDTTL) में छूट माँगी थी। मंत्रालय ने पहली बार हस्तक्षेप किया है।

लेकिन कोर्ट इन जवाबों से संतुष्ट नहीं हुआ। पीठ ने फिर पूछा कि फंसे हुए यात्रियों को मुआवजा कौन देगा एयरपोर्ट पर बदइंतज़ामी और परेशानी रोकने के लिए क्या इंतज़ाम किए गए हैं ऐसी हालत बार-बार क्यों बन रही है।

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अदालत ने सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि वह बताए कि यात्रियों की मदद के लिए अभी तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी लूट न हो इसके लिए कौन से ठोस उपाय किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर मची अफरा तफरी

यात्रियों में गुस्सा है। सोशल मीडिया पर #AirlineLoot ट्रेंड कर रहा है। लोग बता रहे हैं कि कैसे त्योहारों के सीजन में उन्हें दोगुने-तिगुने दाम देकर घर लौटना पड़ा।

अगली सुनवाई में केंद्र को पूरा ब्योरा देना होगा। तब तक सवाल वही है – संकट के नाम पर जेब काटने की छूट किसने दी?

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