Russian oil ban: 90 रूसी जहाज चुपके से रवाना हुए, 30 जहाज भारत पहुंचे
Russian oil ban: रूसी तेल पर प्रतिबंध के बावजूद भारत ने पिछले नौ महीनों में 30 जहाजों के जरिए 5.4 मिलियन टन कच्चा तेल तस्करी करके इंपोर्ट किया।
Russian oil ban: बीते नौ महीनों में 30 जहाजों से देश में 5.4 मिलियन टन कच्चा तेल तस्करी करके लाया गया; तेल की कीमत 2.16 लाख करोड़ रुपये है; दावा किया जा रहा है कि इस तरह का तेल इंपोर्ट समुद्री कानून के आर्टिकल 94 का उल्लंघन है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद भारत के सस्ते रूसी तेल इंपोर्ट पर असर पड़ा है। इसके अलावा, ट्रंप के रूसी तेल कंपनियों पर बैन लगाने से भारत के लिए तेल खरीदना मुश्किल हो गया है।
इस वजह से भारत ने अपनी पहचान छिपाकर पिछले नौ महीनों में झूठे झंडे के नीचे रूस से 5.4 मिलियन टन कच्चा तेल इंपोर्ट किया है। इस तेल की कीमत 2.1 बिलियन यूरो (2.16 लाख करोड़ रुपये) है, ऐसा एक रिपोर्ट में पता चला है।
ये जानकारी यूरोपियन रिसर्च इंस्टीट्यूट सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की एक रिपोर्ट में सामने आई है। रूस ने अब ऐसे झूठे झंडों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है, जिससे यह उसके तेल एक्सपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा बन गया है। हालांकि, इस रिपोर्ट से रूस पर दूसरे देशों का दबाव बढ़ने की संभावना है।
ग्लोबल मार्केट में 11.1 मिलियन टन रूसी तेल
CREA के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच दुनिया भर में 11.1 मिलियन टन (11 मिलियन टन) रूसी कच्चे तेल को ट्रांसपोर्ट करने के लिए कुल 113 जहाजों ने झूठे झंडों का इस्तेमाल किया।
यह ट्रांज़ैक्शन 4.7 बिलियन यूरो का था। सितंबर 2025 के आखिर तक, 90 रूसी जहाज झूठे झंडों के नीचे चल रहे थे। यह दिसंबर 2024 की तुलना में छह गुना ज़्यादा है। जहाज पर अपने असली देश का झंडा नहीं, बल्कि दूसरे देश का झंडा लगा होता है। इस वजह से उसकी असली पहचान, मालिक और उसके देश का पता नहीं चल पाता। इसलिए ऐसे जहाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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को-ऑथर ल्यूक विकेंडेन ने कहा कि यूरोप के समुद्री इलाके नकली झंडे के नीचे चल रहे पुराने और खतरनाक जहाजों के खतरे के प्रति तेजी से कमजोर होते जा रहे हैं। को-ऑथर वैभव रघुनंदन ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से भी ऐसे जहाजों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने और इस प्रैक्टिस को रोकने की अपील की है।
भारत का रूसी तेल के प्रति आकर्षण, लेकिन रिस्क भी बढ़ा
फरवरी 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए बैन की वजह से रूसी तेल कम मात्रा में यूरोप जाने लगा। नतीजतन, भारतीय कंपनियों को यह तेल काफी सस्ते में मिलने लगा।
कुछ सालों में तेल इंपोर्ट में रूस का हिस्सा 1% से 40% हो गया। हालांकि, ये इंपोर्ट समुद्र के कानून के आर्टिकल 94 का उल्लंघन है। किसी दुर्घटना या तेल रिसाव की स्थिति में ये तटीय देशों के लिए पर्यावरण का खतरा पैदा करता है।
इन नकली झंडे वाले जहाजों से तेल का सबसे बड़ा हिस्सा भारत का है। कुल 30 जहाज सीधे भारत आए और भारत ने 2.1 बिलियन यूरो का तेल खरीदा। यह झूठे झंडे के नीचे किया गया सबसे बड़ा आयात है।



